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 सेंसर एण्ड एक्चुएटर  
     
 
परिदृष्टि
एक तरफ स्मार्ट द्रव्यों, संरचनाओं एवं प्रणालियों की खोज और दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर फलते-फूलते आतंकवाद से वांछित गुणों वाले सेंसरों एवं एक्यूएटरों की मांग में दिनोंदिन विस्तार हुआ है । विभिन्न सेंसरों के मध्य, गैस एवं वाष्प सेंसरों की आवश्यकता संरक्षा, पर्यावरण मानिटरिंग एवं प्रक्रिया नियंत्रण हेतु बढ़ रही है तथा कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइआक्साइड, क्लोरिन जैसे विषैली गैसों में मानिटरिंग, मिथेन, एलपीजी, सीएनजी एवं हाइड्रोजन जैसे प्रज्जवलनशील गैसों, एस ओ एक्स, एन ओ एक्स, हाइड्रोकार्बन जैसे ऑटोमोबाइल प्रस्त्रवण प्रदूषकों तथा आद्योगिक, नाभकीय एवं घरेलू क्षेत्रों के लिए आद्रता मापन एवं नियंत्रण जैसे विविध क्षेत्रों में इसका अनुप्रयोग बढ़ा है । इसके अतिरिक्त एर्रे अथवा ई-नोज के रूप में गैस सेंसर विस्फोटकों, नर्व गैसों, फलों एवं मछलियों का ताजापन की पहचान, चाय-सुगंधी मॉनिटरन तथा श्वास - अल्कोहल विश्लेषकों, डाइबिटिज पहचान आदि चिकित्सकीय निदानों में अत्याधिक महत्व की वस्तु है । वर्त्तमान में हमारी गतिविधियों में मिथेन, एलपीजी, सीएनजी, कार्बनमोनोक्साइड, सल्फर डाइआक्साइड, अल्पमात्रा नमी, अल्कोहल (श्वाँस विश्लेषक) एवं एसीटोन (श्वाँस में डाइबिटिज का जैव अंकक) की पहचान हेतु ठोस अवस्था सेंसरों का विकास सम्मिलित है ।

मूलत:, एक स्मार्ट संरचना में सेंसरों, एक्यूएटरों एवं नियंत्रण परिपथ का समावेश होता है । एक्यूएटर एक ट्रान्सड्यूसर होता है, जोकि यांत्रिक ऊर्जा (विस्थापन/बल) में एक निवेश ऊर्जा ट्रान्सड्यूस करने में योग्य होता है 1 पीजी इलेक्ट्रिक द्रव्यों का वर्त्तमान में उपयोग सेंसरों एवं सक्यूएटरों के रूप में विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों में होता है तथा यह स्मार्ट द्रव्यों एवं संरचनाओं के परिदृश्य में एक मुख्य भूमिका अदा करता है। अल्ट्रासोनिक संरचनात्मक स्वास्थ्य मॉनिटरन (एमएचएम) एक क्षेत्र हे, जहाँ वैकर्स/पैचेज के स्वरूप में पीजी इलेक्ट्रिक द्रव्य सेंसरों एवं एक्यूएटरों दोनों के रूप में कार्य कर सकता है । हमलोगों ने पीजी इलेक्ट्रिक द्रव्यों का उपयोग करके ऊर्जा पैदावाद युक्तियों पर कार्य का भी पहल किया है ।

हाल ही में, सहयोगिता में वृद्धि हेतु, ताकि ठोस परिणाम प्राप्त किया जा सके, डीएसटी एवं सीएसआईआर के संरक्षण में सीजीसीआरआई में एक “सेंसर हब” बनाया गया है । वर्त्तमान में, हब में सीजीसीआरआई के अतिरिक्त कोलकाता के आस-पास के अन्य उन संस्थाओं ने चाय सुगंधी हेतु इलेक्ट्रोनिक नासिका, एमईएमएस आधारित बैटरी प्रचालित मिथेन एवं कार्बन मोनोक्साइड सेंसरों एवं आर्सेनिक पहचान औजारों के विकास, निर्माण एवं जाँच हेतु हाथ बॅटाया है ,जो कि सेंसर एवं संबंधित गतिविधियों से लंबे समय से जुड़े हुए हैं, उदाहरणार्थ -जादवपुर विश्वविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय, बंगाल ईजीनियरी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय तथा अग्रिम कम्प्यूटिंग विकास केन्द्र (सी-डेक) कोलकाता आदि । इस हब द्वारा खाद्य, कृषि एवं पर्यावरण अनुप्रयोगों के लिए पायलट स्तरीय उत्पादन एवं जाँच सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाऐंगी, ताकि विकसित प्रोद्योगिकियों को सीधे इच्छुक पक्षों को स्थानान्तिरित किया जा सके ।


    Updated on: 03-10-2010 09:56 
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