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महत्वपूर्ण घटनाएँ (2006-2008 के दौरान)

सीजीसीआरआई - विश्वविद्यालय अर्न्तक्रिया कार्यक्रम की पहल की गई :
सिरामिक एवं चमकदार कुम्भकारी में डिजाइनिंग पर एक द्विवार्षिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम का शुभारम्भ केन्द्रीय काँच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान (सीजीसीआरआई) कोलकाता एवं वर्धमान विश्वविद्यालय के बीच एक अन्तक्रिया कार्यक्रम के माध्यम से किया गया था । इस पाठ्यक्रम का उद्घाटन दिनांक 7 सितम्बर, 2006 को संस्थान के मेघनाथ ऑडिटोरियम में किया गया था । श्री निरूपक सेन, सम्माननीय प्रभारी मंत्री, उद्योग, विकास एवं योजना, पश्चिम बंगाल सरकार ने औपचारिक रूप से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया था । इस अवसर पर मुख्य अतिथि एक बहु प्रतिश्ठित कला मर्मज्ञ, श्री रामानन्द बंद्योपाध्याय थे । श्री बी भट्टाचार्या, अध्यक्ष सीजीसीआरआई का अनुसंधान परिषद, विशिष्ट सम्मानित अतिथि थे । अन्य उपस्थित महानुभावों में प्रो ए के मल्लिक, उप कुलपति वर्धमान विश्वविद्यालय एवं श्री एक के सेन, सचिव कला एवं प्रकल्प महाविद्यालय, वर्धमान विश्वविद्यालय एवं श्री एम के सेन, सचिव, कला एवं प्रकल्पमहाविद्यालय, वर्धमान विश्वविद्यालय से संम्बद्धन प्राप्त आदि थे । श्री ए बी मित्रा, कला एवं प्रकल्प महाविद्यालय, वध्रमान विश्वविद्यालय ने धन्यवाद ज्ञान किया था । सम्मनानीय मंत्री महोदय ने सीजीसीआरआई में एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया था, जिसमें संस्थान द्वारा विकसित कई गतिविधियों एवं उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था ।

श्री एच एस मैइती, निदेशक सीजीसीआरआई श्री निरूपम सेन, सम्माननीय प्रभारी मंत्री, उद्योग, विकास एवं योजना
पश्चिम बंगाल सरकार को एक प्रदर्शनी स्टॉल पर भ्रमण के दौरान अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के बारे में समझाते हुए ।


पारम्परिक रूप से सिरामिक कला एवं प्रकल्प का एक माध्यम है । इसके ग्रामीण विकास कार्यक्रम के एक अंक के रूप में अन्तक्रियापाठ्यक्रम को इस प्रकार संगठित एवं प्रकल्पित किया गया है कि यह स्व रोजगार पैदा करे तथा कला एवं मूर्तीकला के योग्य छात्रों के लिए डिजाइनर सह कलाकार के रूप में विशेष कर सिरामिक उद्योगों में रोजगार के अवसर पदा करे । डिप्लोमा पाठ्यक्रम की कक्षाएँ पन्द्रह विद्यार्थियों के नामाकंन के साथ सितम्बर, 8 , 2006 से प्रारम्भ हो गई हैं ।

राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस 2007
संस्थान में राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस समारोह का आयोजन दिनांक मई 11, 2007 को किया गया । इस दिवस पर थीम: ऊर्जा की सुरक्षा में प्रोद्योगिकी की भूमिका था । डा सुजन चक्रवर्ती, माननीय संसद सदस्य, भारत सरकार इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे । दो प्रोद्योगिकी दिवस व्याख्यान दिए गए थे । प्रथम व्याख्यान भारत वर्ष के लिए सौर्य-प्रकाश मिशन पर डा एस पी गोन चौधुरी, विशेष सचिव, पश्चिम बंगाल सरकार एवं निदेशक पश्चिम बंगाल रिन्यूएबल ऊर्जा विकास प्राधिकरण (डब्ल्यूबीआरईडीए) द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि द्वितीय व्याख्यान- क्या भारत तेल पर विदेश विनिमय वर्हिगमन में वर्त्तमान मूल्य के विज्ञान संस्थान, बंगलोर द्वारा प्रस्तुत किया गया था । इस समारोह में कोलकाता एवं इसके आर-पास के विभिन्न संस्थानों एवं उद्योगों से प्रतिभागियों ने भाग लिया था । इस अवसर पर बोलते हुए डा सुजन चक्रवर्ती ने उचित प्रोद्योगिकी की उन्नति में एक स्पष्ट एवं समर्थक नीति की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विकास का फल समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहूँच सके । उनहोंने वैज्ञानिकों एवं प्रोद्योगिकयों को जागरूक रहने के लिए भी सतर्क किया, ताकि वे विश्व के अपने प्रतियोगियों से पीछे न रह जाएँ । उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में पर्यावरण क्षति नियंत्रण में प्रोद्योगिकी की महति भूमिका पर भी बल दिया । उन्होंने दोनों वक्ताओं द्वारा विषय के चयन पर भी प्रसन्नता व्यक्त किया । मुक्ष्य अतिथि द्वारा समारोह के अन्त में नवीनीकृत मेघनाद साहा ऑडिटोरियम का उद्घाटन भी किया ।

डा सुजान चक्रवर्ती द्वरा राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस 2007 पर सम्भाषण करते हुए


स्थापना दिवस समारोह का आयोजना
सीएसआईआर का 64वाँ स्थापना दिवस का आयोजना 26 सितम्बर, 2006 को समारोह-पूर्वक किया गया । इस अवसर पर श्री बी भट्टाचार्जी, अध्यक्ष, संस्थान के अनुसंधान परिषद मुख्य अतिथि थे । उन्होंने कर्मचारियों को स्मरण दिलवाया कि परिषद के संस्थापकों को दी जाने वाली श्रद्धांजली का सर्वोत्तम माध्यम सामूहिक उत्तरदायित्व की संस्कृति का निमा्रण तथा कार्यस्थल पर सदैव नवीनता लाने की त्तपरता में सन्निहित है । स्थापना दिवस के अवसर पर इस अवधि के दौरा सेवानिवृति काल पूरा करने वाले 29 कर्मचारियों को परिषद में उनकी सेवाओं का सम्मान करते हुए प्रमाण पत्र एवं उपहार देकर बधाई दी गई । सात कर्मचारियों को परिषद में 25 वर्षों की सेवा पूरी करने के उपलक्ष्य पर घड़ी देकर सम्मानित किया गया । स्थापना दिवस समारोह के अंश के रूप में आयोजित सांस्कृतिक, वाद-विवाद एवं क्वीज प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को भी पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया । संस्थान छात्रों एवं सामान्य नागरिकों के लिए खुला रखा गया था ।

64वाँ सीएसआईआर स्थापना दिवस : छात्रों को विशेष काँच खंडों के बारे में समझाया जा रहा है

प्रो सुशान्त दत्तगुप्ता वर्ष 2007 में स्थापना दिवस पर सम्भाषण करते हुए

प्रो सुशान्त दत्तगुप्ता, निदेशक भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईएसईआर) कोलकाता 65वें सीएसआईआर स्थापना दिवस पर 26 सितम्बर, 2007 को मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे । इस अवसर पर श्री सुशान्त दत्तगुपता ने नैनो चुम्बकों में छूट विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान भी दिया, जिसमें उनहोंने विशेषकर काँच जैसे नैनो संरचनाकृत द्रव्य प्रणाली के क्षेत्र में सीजीसीआरआई के कुछ प्रोद्योगकी विकास परियोजना के साथ अपने मौलिक अनुसंधान के कुछ महत्वपूर्ण संबन्धों को भी परिभाषित किया । उन्होंने एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसे सामान्य नागरिकों के लिए खोले गए दिन के रूप में प्रदर्शित किया गया था ।

5वाँ आत्माराम स्मारक व्याख्यान
64वाँ सीएसआईआर स्थापना दिवस के दोपहर में, डा त्रिदिवेश मुखर्जी, उप प्रबंध निदेशक (इस्पात), टाटा स्टील्स, जमशेदपुर ने 5वाँ आत्माराम स्मारक व्याख्यान दिया । यह बहु प्रपिक्षित व्याख्यान डा आत्माराम की स्मृति में आयोजित किया गया, जो कि संस्थान के संसथापनक निदेशक थे तथा बाद में सीएसआईआर के महानिदेशक बने । इस वर्ष के वक्ता का विषय प्रोद्योगिकी एवं वृद्धि : सम्पर्क था । वक्ता का परिचय श्री बी भट्टाचार्जी, अनुसंधान परिषद, सीजीसीआरआई के अध्यक्ष द्वारा दिया गया, जिन्होंने डा एच एस मैइती, निदेशक, सीजीसीआरआई के पश्चात समारोह की अध्यक्षता किया । उन्होंने इस स्मारक व्याख्यान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा डा आत्माराम के स्वतंत्र भारत में विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के विकास में योगदान की भूरी-भूरी प्रशंसा किया ।

डा टी मुखर्जी (बायें) को मुख्य अतिथि की भट्टाचार्जी द्वारा प्लेक प्रदान किए जाते हुए

डा मुखर्जी ने अपने व्याख्यान को तीन भागों में विभक्त किया था - (1) प्रतिव्यक्ति आय एवं प्रोद्योगिकी-सम्भाव्य संबंध (2) प्रोद्योगिकी विकास का इतिहारस, एवं (3) प्रोद्योगिकी विकास पर विचारों का प्रस्फुटन । उन्होंने स्मरण दिलवाया कि आर्थिक विकास शून्य के जोड़ों का खेल नहीं है, यह वह खेल है, जिसमें सभी विजयी हो सकते हैं-यदि उपयुक्त प्रोद्योगिकी का चुनाव तथा अनुप्रयोग किया जाए । मुख्य विकास नवीनता द्वारा सहायता प्राप्त अविच्छिन्न विकास के माध्यम से होता है, जोकि मानव मात्र को क्रमिक सुधारों द्वारा घोषित वृद्धि की धीमी गति से विलगित होने के बाध्य करता है । इसका एक उदाहरण यूके में औद्योगिक क्रांति के दौरान वाष्प-ईंजिन का लागू करना था । डा मुखर्जी ने इशारा किया कि यूके ने औद्योगिक क्रांति द्वारा उच्चत्तर आर्थिक विकास प्राप्त कर सका, क्योंकि उनके पास खुला समाज, वैयक्ति पहल, वैचारिक वैज्ञानिक सोच, भौगोलिक श्रेष्ठता था, साथ ही ग्रेट ब्रिटेन कोयला एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध था । द्रुत प्रोद्योगिकी विकास पर बोलते हुए, उन्होंने विचार विमर्श किया कि कैसे परिस्थितियाँ प्रोद्योगिकी विकास के लिए भूमि तैयार करती हैं, तथा युद्ध की विभिषिका से जापान की आर्थिक उन्नति का उदाहरण प्रस्तुत किया । उचित प्रोद्योगिकी के देशज अनुप्रयोगों पर डा मुखर्जी ने 1960वें एवं 1970वें दशक में भारत द्वारा प्राप्त की गई हरित क्रांति का उदाहरण दिया । उन्होंने वर्त्तमान प्रोद्योगिकी परिदृश्य एवं आर्थिक नीति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि प्रति व्यक्ति आय जीवन स्तर इंगित करता है तथा परवर्ती देश की प्रोद्योगिकी स्थिति की सूचक है । प्रोद्यागिकीय सफलता के लिए प्रोद्योगिकीय परिवेश एवं ध्यान मौलिक लक्षण होना चाहिए, उन्होंने स्पष्ट किया ।

हिन्दी सप्ताह
संस्थान द्वारा 12-21 सितम्बर, 2006 के दौरान हिन्दी सप्ताह मनाया गया । इस अवसर पर, प्रतिष्ठित कवि श्री लीलाधर जगुड़ी मुख्य अतिथि थे तथा उन्होंने कविता का आत्मवृत: भाषा और कविता के अन्तसम्बंध विषय पर सातवाँ स्वर्ण जयन्ती व्याख्यान दिया । उन्होंने हिन्दी व उर्दु के महान उपन्यासकार मुंशी प्रेम चन्द पर एक रंगीन पोस्टर, उनकी 125वीं वर्षगांठ पर अनावृत किया । प्रो असमीम देव पूर्व कुलपति, विद्यासागर विश्वविद्यालय तथा तुलनात्मक साहित्य साहित्य के उदभट विद्वान इस अवसर पर सम्मानित अतिथि थे । इस सप्ताह भर चलने वाले समारोह का उद्घाटन श्री ए के पांडे, प्रमुख केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, भारत सरकार, कोलकाता द्वारा किया गया था । हिन्दी सप्ताह अपने अंतिम दिवस पर पराकाष्ठा पर था, जब कि अवसर पर संस्थान में कवि संध्या नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

हिन्दी सप्ताह 2007 में काव्य संध्या के दौरान एक कवियत्रि कवियों के समक्ष अपनी कविता पाठ करते हुए

पार्श्वगायक हैमन्ती शुक्ला हिन्दी दिवस 2007 पर कार्यक्रम प्रस्तुत करते हुए

लोकप्रिय बांग्ला कवि एवं लेखक श्री सुनील गंगोपाध्याय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की । इस अवसर पर कवियों का एक समूह - श्री लीलाधर जगुड़ी, री माणिक बच्छावत, श्री अमिताभ गुप्ता एवं श्री एकानत श्रीवास्तव-उपस्थित था । संस्थान के कर्मचारियों द्वारा ख्यातिप्रापत कवियों की कविताओं का पाठ करके उन्हें सम्मानित किया गया । बाद में कवियों द्वारा क्रमश: बांग्ला एवं हिन्दी में पाठ किए गए अपनी हृदयस्पर्शी कविताओं द्वारा दर्शकों को अभिभूत कर दिया गया ।

हिन्दी सप्ताह पुन: सितम्बर 28-अक्तूबर 11, 2007 के दौरान मनाया गया था । इस बार प्रतिष्ठित बांग्ला कवि श्री निरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती द्वारा सीजीसीआरआई के मेजबार ऑडिटोरियम में दिनांक 11 अक्तूबर को आयोजित समापन समारोह में अध्यक्षता की गई । हिन्दी समाज और आधुनिकता की अवधारणा पर स्वर्ण जयन्ती व्याख्यान इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो इन्द्रनाथ चौधुरी, विद्वान एवं भारतीय भाषा परिषद के निदेशक द्वारा दिया गया था । दिवस की परकाष्ठा पार्श्वगायक हैमन्ती शुक्ला द्वारा प्रस्तुत किए गए संगीत संध्या केरूप में था, जहाँ उन्होंने विगत वर्षों के कुछ अविष्मरणीय गीतों को गाकर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया ।

ईंधन सेल एवं हाइड्रोजन ऊर्जा पर भारत - जर्मन कार्यशाला
केन्द्रीय काँच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान (सीजीसीआरआई) कोलकाता द्वारा 29-31 जनवरी, 2007 के दौरान कोलकाता में ईंधन सेल एवं हाइड्रोजन ऊर्जा पर भारत-जर्मन कार्यशाला का आयोजना किया गया । इस कार्यक्रम का वित्त प्रबंध मुख्यत: अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी कार्य निदेशालय (आईएसटीएडी), सीएसआईआर, भारत एवं शिक्षा एवं अनुसंधान के फेडरल मंत्रालय (बीएमबीएफ) जर्मनी द्वारा किया गया था । इस कार्यशाला में जर्मनी में विभिन्न उत्कृष्ठ केन्द्रों, यथा-फोर युगस्जेनट्रम जे लिच (एफजेडजे) जर्मन एरोस्पेस सेन्टर (डीएलआर) युनिवर्सिटी ऑफ कार्ल श्रुहे (टीएच) फ्रांन्हॉफर इन्स्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजित एन्ड सिस्टम (आईकेटीएस) फोर चुंग स्जेनट्रम कारसिरूहे, युनिवर्सिटी ऑफ हनोवर, आर डब्ल्यू टी एच आचेन युनिवर्सिटी एन्ड ईएनबीडब्ल्यू एनर्जी बेडन, वर्टेन बर्ग एजी, आदि के जर्मन वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा भाग लिया गया । भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व विथ्भन्न सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, बीएआरसी मुम्बई, विभिन्न आईआईटी, आरसीआई, हैदराबाद, एनएमआरएल, अम्बरनाथ एवं ईंधन सेल प्रोद्योगिकी केन्द्र, चेन्नई सहित विभिन्न महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने किया था । इसके अतिरिक्त, बीएचईएल एवं एमएनआरई, भारत सरकार ने भी इस कार्यशाला में भाग लिया । कुला मिलाकर, करीब 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें 11 जर्मन वैज्ञानिक सम्मिलित थे (विस्तृत रिपोर्ट सीएसआईआर समाचार, जून 15, 2007 के अंक में)


प्रो डी स्ट्रोवर, जर्मन प्रतिनिधियों का नेता, प्रमुख सम्भाषण देते हुए



सीजीसीआरआई के ईंधन सेल एवं बैटरी प्रयोगशाला में जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा भ्रमण


सहस्त्रावदि ऊर्जा शीर्ष - सम्मेलन 2007
केन्द्रीय कॉच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान (सीजीसीआरआई) कोलकाता द्वारा ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन के मिलेनियम संस्थान, कोलकाता (एसआईईईएम) एवं पेट्रोलियम संरक्षण अभिकरण (पीसीए), कोलकाता की सहयोगिता में 27-29 सितम्बर, 2007 की अवधि के दौरान सीजीसीआरआई, कोलकाता में सहस्त्रावदि ऊर्जा शीर्ष-सम्मेलन 2007 का आयोजना किया गया । डा आर एन बासु, सीजीसीआरआई, कोलकाता के ईंधन सेल एवं बैटरी प्रभाग के प्रमुख इस शीर्ष-सम्मेलन के संयोजक थे । इस शीष-सम्मेलन का उद्देश्य ऊर्जा सं संबंधित मुद्दों से संलग्न विशेषज्ञों एवं विचारकों को वांछित विकल्पों एवं प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर लाना था । ऊर्जा अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों पर 17 आमंत्रित व्याख्यान, 30 अवदान व्याख्यान एवं 3 आद्योगिक प्रस्तुतीकरण इस शीर्ष सम्मेलन के दौरान उपस्थित किए गए । इस राष्ट्रीय घटना में विभिन्न अनुसंधान संगठनों, विश्वविद्यालयों/आईआईटी, अन्य शैक्षणिक संस्थान एवं उद्योगों सक करीब 140 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।


एमईएस-2007 के उद्घाटन सत्र के दौरान मंचासीन विशिश्ठ व्यक्तिगतगण




    Updated on: 10-06-2010 10:30 
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