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डॉ. के. मुरलीधरन के संक्षिप्त जीवन वृत

डॉ. कुट्ट्नेल्लोर मुरलीधरन ने बी.टेक एवं पीएचडी की उपाधी बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय-प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU-IT), वाराणसी से प्राप्त किया। उन्होनें डॉ. डी. बनर्जी (DMRL) एवं प्रो.लेले. (BHU) के पर्यवेक्षण में शोध प्रबंध “Phase Equilibria and Phase Transformations in Ti3AI-Nb Alloys”) पर PHD किया। स्नातक प्रशिक्षु के रूप में मिश्र धातु निगम, हैदराबाद (MIDHANI) में थोड़े समय के लिए कार्य करते हुए वर्ष 1984 में डिफेन्स मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटॉरी (DMRL), हैदराबाद में वैज्ञानिक के रूप में कार्य आरंभ किया। डॉ. मुरलीधरन ने वर्ष 1995-1997 के मध्य कार्नेज मेलन विश्वविद्यालय, पिट्सबर्ग, यूएसए में रिसर्च एसोशिएट के रूप में कार्य किया। वर्ष 1989-2010 के मध्य DMRL में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी विभाग के विभागाध्यक्ष रहे एवं वर्ष 1999-2004 के मध्य “Science and Design of Materials at Atomic Scale” विषय पर परियोजना के प्रोजेक्ट लीडर के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में ही DMRL में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी सुविधा का विकास अंतरराष्ट्रीय मानक तक पहुँचा। बाद में उन्होनें “Development of Specialty Steels for Naval Application”.नामक परियोजना में नेतृत्व दिया। उनके मार्गदर्शन में भारतीय जल सेना में युद्ध पोत निर्माण कार्य के लिए कई स्टील उत्पादों का निर्माण किया गया। वैज्ञानिक दल के द्वारा इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप अब युद्धपोत निर्माण के लिए अब बाहर से कोई भी स्टील आयात करने की आवश्यकता नहीं है। वाइड प्लेट्स, बल्ब बार, वेल्ड कंन्ज्यूमेबल्स, फोर्जिंग्स कास्टिंग आदि, इस संस्थान के स्वदेशी उत्पाद हैं। DMR-249A एवं DMR-249B नामक दो स्टीलों में क्रमशः 390MPa एवं 580MPa परिमाण में YS विद्यमान है। देश का प्रथम एयरक्राफ्ट कैरियर, INS विक्रान्त II जिन्हें हाल ही में अधिकृत किया गया है, में इन्हीं स्टीलों का प्रयोग किया गया है।

डॉ. के. मुरलीधरन वर्ष 2005-06 के मध्य DMRL के मानव संसाधन विकास समन्वयक रहे और बाद में मटीरियल्स मैनेजमेंट विभाग के विभागाध्यक्ष बने (2010)। आप DRDO में 2003-2005 के मध्य थिंकटैंक सदस्य रहे। आप वर्ष 2011 में डीआरडीओ, नई दिल्ली में डिरेक्टर ऑफ मटीरियल्स नियुक्त किए गए जिसके अंतर्गत NBC प्रतिरक्षा एवं नैनोसाइंस टेक्नोलॉजी कार्य एवं मटीरियल्स क्लस्टर लैबोरेटॉरी से संबन्धित कार्य किया।

आपने वर्ष (2013-2015) के मध्य DRDO में टेक्निकल कोर ग्रूप में निदेशक, तकनीकी (मटीरियल्स) पदभार संभाला और सीएसआईआर-सीजीसीआरआई में अष्टम निदेशक के पद पर कार्यभार ग्रहण करने से पहले तक DRDO में मटीरियल्स संबंधी कार्यों में सलाह एवं विषय संबंधी पूरी जानकारी देते रहे। आपको अनेक पुरस्कार एवं सम्मानों से विभुषित किया गया है। “Development of Complete ore-product Cycle for Titanium” के लिए वर्ष 2005 में फिर 2007 में “Development of Specialty Nava Steels” के लिए दो DRDO अग्नि सम्मान, द्वारा हाल ही में विभूषित किया गया। वर्ष 2012 में इन्स्टीट्यूशन ऑव इंजीनियर्स द्वारा एमिनेंट इंजीनियरिंग पर्सोनलिटी सम्मान एवं वर्ष 2013 में बीएचयू, वाराणसी के मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा डिस्टिंग्यूइश्ड एल्यूम्नि अवार्ड प्राप्त किया।

डॉ.मुरलीधरन के पसंदीदा अनुसंधान विषय हैं साइंस एण्ड डिज़ाइन ऑव एड्वान्स्ड मटीरियल्स एण्ड मल्टिस्केल माइक्रोस्ट्रक्चरल कैरेक्टराइजेशन। इनमें जिन पद्धति का प्रयोग किया गया है वे हैं ट्रान्समिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एण्ड 3D एटम प्रोव फील्ड आयन माइक्रोस्कोपी, जैसा कि इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल्स एवं सॉलिड स्टेट फेज़ ट्रान्सफॉर्मेशन के अध्ययन में प्रयोग होता है। DRML एवं CMU में उनका शोध कार्य विभिन्न मटीरियल्स सिस्टम्स जैसे टाइटेनियम पर आधारित मिश्र धातु एवं इनके इंटरमेटेलिक्स Ti3Ai एवं TiA; स्पेशियलिटी स्टील्स, Ni आधारित सुपर एल्लोय, हाई एनर्जी रेयर अर्थ पर्मानेंट मेग्नेट्स एवं सिरामिक मैट्रिक्स कॉम्पोजिट्स पर केन्द्रित रहा। डॉ. मुरलीधरन अनेक व्यावसायिक संगठनों के साथ सदस्य के रूप में जुड़े हैं। आप वर्ष 2011-2013 तक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष पद पर रहे एवं (2013-2015) में इसी संस्थान के अध्यक्ष हैं।

    Updated on: 17-08-2015 15:26 
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